सोमवार, 5 जून 2017

कांग्रेस और पाकिस्तान की भाषा एक कैसे?

 गोहत्या  के खून के दाग अभी धुल भी नहीं पाए थे कि कांग्रेस पाकिस्तान की बोली बोलकर एक बार फिर जनता की नजरों में गिर गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा नीत केंद्र सरकार के विरोध में कांग्रेस इतनी अंधी हो गई है कि उसे राष्ट्रहित दिखाई नहीं देते हैं। मोदी सरकार का विरोध करते-करते कांग्रेस के नेता भारत और उसकी संस्कृति के विरोध पर उतर आते हैं। कांग्रेस ने इस बार तो हद ही कर दी। मोदी सरकार की निंदा से भरी १६ पृष्ठ की एक पुस्तिका कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और राज बब्बर ने बीते शनिवार को जारी की है, जिसमें उसने जम्मू-कश्मीर के संबंध में एक भयंकर गलती की है। कांग्रेस ने पुस्तिका में चीन-पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर का जिक्र करते हुए एक नक्शा प्रकाशित किया है। इस नक्शे में उसने जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र को 'इंडियन ऑक्युपाइड कश्मीर' बताया है। जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में इस प्रकार की भाषा का उपयोग पाकिस्तान करता है या फिर पाकिस्तान परस्त अलगाववादी। भारत के प्रति निष्ठावान संगठन या व्यक्ति सम्पूर्ण जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानते हैं। पाक अधिक्रांत कश्मीर के क्षेत्र पर भी भारत अपना दावा जताता है। लेकिन, मोदी सरकार के विरोध में अंधी कांग्रेस भारत के अभिन्न अंग को 'भारत अधिकृत कश्मीर' बता गई। यह कांग्रेस की भूल है या फिर जम्मू-कश्मीर के मसले पर उसकी नीति?
          यह पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस पाकिस्तान के साथ खड़ी दिखाई दे रही है। इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान जाकर भारत सरकार के खिलाफ वहाँ के न्यूज चैनल पर समर्थन माँगते पकड़े गए थे। इसी तरह जब भारत की वीर सेना ने पाकिस्तान पर 'लक्षित हमला' (सर्जिकल स्ट्राइक) किया था, तब भी कांग्रेस बाकि विपक्षी दलों की तरह पाकिस्तान की बोली बोलती दिखाई दे रही थी। लक्षित हमले के प्रमाण माँग कर उसने यह जताया था कि उसे अपनी सेना पर कम और पाकिस्तान के दावे पर अधिक भरोसा है। (इस सन्दर्भ में यह लेख भी पढ़ें - माँ ने कहा 'मौत का सौदागर' और बेटा बोला 'खून का दलाल' ) हाल, देश जानता है कि आज जम्मू-कश्मीर की जो समस्या है, उसका जनक कौन है? कांग्रेस और उसके नेतृत्व की इसी प्रकार की मानसिकता के कारण आज कश्मीर आतंकवाद और अलगाववाद की आग में जल रहा है। कांग्रेस की ताजा गलती कश्मीर पर उसकी उसी सोच का पुन: प्रकटीकरण है। जब भाजपा ने देश को बताया कि कांग्रेस अपनी पुस्तिका में कश्मीर को 'भारत अधिकृत कश्मीर' बता रही है, तब देशभर से कांग्रेस को लानत भेजी जाने लगीं। जनता का आक्रोश देखकर कांग्रेस माफी माँगने पर मजबूर हुई। हालाँकि, देशविरोधी भूल पर भी कांग्रेस के नेता पूरी ईमानदारी से माफी नहीं माँग रहे हैं। इसे दो बातों से समझा जा सकता है। एक, कांग्रेस अपनी जिम्मेदारी भी स्वीकार कर रही है और इसे मुद्रण की गलती बता कर पल्ला भी झाडऩे की कोशिश कर रही है। आखिर यह कैसे संभव है कि कांग्रेस मोदी सरकार के विरोध के लिए पुस्तिका छापती है, लेकिन उसकी नजर से 'भारत अधिकृत कश्मीर' जैसी बड़ी गलती छूट जाती है। दरअसल, कांग्रेस में लिखने-पढऩे का ठेका कम्युनिस्टों को दिया जाता रहा है और कम्युनिस्ट कभी भी भारत के प्रति निष्ठावान नहीं रहे हैं। कांग्रेस के लिए यह भाषा गलत हो सकती है, लेकिन कम्युनिस्टों के लिए यह सर्वथा उचित है। कांग्रेस को वास्तव में अपनी रही-सही साख बचानी है, तो उसे सबसे पहले कम्युनिस्टों को पार्टी में से खदेडऩा होगा। दो, कांग्रेस अपनी गलती को 'न्यायसंगत' बताने के लिए भाजपा की गलती का उदाहरण दे रही है। कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि वर्ष 2014 में भाजपा ने भी अपनी वेबसाइट पर ऐसा ही नक्शा दिखाया था, जिसमें अरुणाचल प्रदेश को चीन का हिस्सा दिखाया गया था। कांग्रेस का यह तर्क बताता है कि वह अपनी गलती को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पा रही है और न ही उससे कोई सीख लेना चाहती है। 
           बहरहाल, पिछले कुछ समय में कांग्रेस ने जिस प्रकार की गलतियां की हैं, उन्हें देखकर देश की जनता को अब उसकी नीयत पर संदेह होने लगा है। देश पर वर्षों शासन करने वाली और देश की प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी कांग्रेस आखिर इस प्रकार की गलतियां कैसे कर सकती है? जिन मुद्दों देश एक तरफ है, उन मुद्दों पर कांग्रेस दूसरी ओर खड़ी दिखाई देती है। जेएनयू में जब अलगाववादियों ने 'भारत के टुकड़े करने के नारे लगाए' तब कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गाँधी क्या सोच कर उनके साथ खड़े हुए थे? जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस कभी अलगाववादियों के साथ खड़ी हो जाती है, तो कभी पत्थरबाजों का समर्थन करती दिखाई पड़ती है। इसी प्रकार जब भी गोहत्या और गोमांस भक्षण का प्रश्न आता है, कांग्रेस देश के जनमानस के विरुद्ध खड़ी दिखाई देती है? केरल में तो उसने हद ही कर दी। केरल में केंद्र सरकार का विरोध करते-करते कांग्रेस गोहत्यारी हो गई। कांग्रेस का हालिया व्यवहार हैरान करने वाला है। कांग्रेस को अपनी गलतियों से सबक लेना होगा, वरना यह तय है कि भारत कांग्रेस मुक्त हो जाएगा। 

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (06-06-2017) को
    रविकर शिक्षा में नकल, देगा मिटा वजूद-चर्चामंच 2541
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’विश्व महासागर दिवस और ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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